नव हिजरी वर्षनव वर्ष के अवसर पर प्रत्येक वर्ष देखा जाता है कि लोग हंसते खेलते, गाते बजाते, पटाख़े उड़ाते और मौज मस्ती करते हैं। बल्कि ऐसी रंगरेलियाँ होतीं और नाइट कल्ब सजते हैं कि जिन्हें देख और सुन कर एक सामान्य  व्यक्ति का सर शर्म से झुक कर रह जाता है।

अभी हम हिजरी पंचांग के अनुसार नव वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं, आज मुहर्रम की प्रथम तिथि है। एक वर्ष का अंत और नव वर्ष में प्रवेश करना यह एक मुस्लिम के लिए आनंद का विषय नहीं होता , खुशी की सौगात नहीं होती बल्कि इस में जवाबदेही की दावत होती है , अपनी आत्मा के जाइज़ा लेने का संदेश होता है , इस में इस बात की एक आदमी को शिक्षण मिलती है कि वह अपने जीवन के बारे में सोचे कि वह कहाँ है ? क्या कर रहा है ? और उसे क्या करना चाहिए था ?

यह केवल एक वर्ष का जाना दूसरे वर्ष का आना नहीं अपितु हमारे जीवन से एक वर्ष कम हुआ है और हम महाप्रलय के दिन से एक साल करीब हुए हैं। ऐसे ही एक दिन आयेगा कि हमारे जीवन की अंतिम घंटी बजेगी और हम हमेशा के लिए इस दुनिया से चले जाएंगे. हाँ यह दुनिया समाप्त होने वाली है, यह पानी का बुलबुला है,  हमारा जीवन सीमित है और यह प्रति दिन बर्फ के समान पिघल रहा है. बुद्धिमान वही है जो अपने नफ्स का जाइज़ा लेता है,  और न्याय के दिन की तैयारी करता है और बुद्धिहीन वह है जो अपनी इच्छाओं के पीछे लगा रहता है और अल्लाह से झूठी उम्मीदें बांधे रहता है।

इसलिए जरूरत है कि हम मौत की सख्ती को याद करें, कब्र के अंधेरे को याद करें, मुनकर नकीर के प्रश्नों को याद करें,  न्याय के दिन के भय को याद करें, जन्नत और जहन्नम की स्थिति पर विचार करे, अल्लाह ने कहाः

يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنَّ وَعْدَ اللَّـهِ حَقٌّ ۖ فَلَا تَغُرَّنَّكُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا ۖ وَلَا يَغُرَّنَّكُم بِاللَّـهِ الْغَرُورُ ﴿ 5 ﴾ إِنَّ الشَّيْطَانَ لَكُمْ عَدُوٌّ فَاتَّخِذُوهُ عَدُوًّا ۚ إِنَّمَا يَدْعُو حِزْبَهُ لِيَكُونُوا مِنْ أَصْحَابِ السَّعِيرِ ﴿٦﴾  سوره فاطر

” ऐ लोगों! निश्चय ही अल्लाह का वादा सच्चा है। अतः सांसारिक जीवन तुम्हें धोखे में न डाले और न वह धोखेबाज़ अल्लाह के विषय में तुम्हें धोखा दे (5) निश्चय ही शैतान तुम्हारा शत्रु है। अतः तुम उसे शत्रु ही समझो। वह तो अपने गिरोह को केवल इसी लिए बुला रहा है कि वे दहकती आग वालों में सम्मिलित हो जाएँ (6)  “

एक कंपनी साल गुजरने के बाद अपनी आय की समीक्षा करती है , लाभ और हानि की गणना करती है और फिर उसी के अनुपात में अगले साल के लिए योजना बनाती है। तो अब हमें एक मुसलमान के नाते पिछले वर्ष के सम्बन्ध में विचार करना चाहिए और अगले वर्ष के लिए योजना बनानी चाहिए।

गत वर्ष नवीन हिजरी वर्ष के आगमन पर हम नव मस्लिम भाइयों को उपदेश दे रहे थे, हम ने उनके बीच एक प्रश्न पत्र वितरित किया जिस में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं के खाने बनाये गए थे, हमने भी अपने पास एक प्रश्न पत्र रखा, फिर कहा कि आज घर जाने के बाद हम सब अपने आवश्यक कामों को खत्म कर लें और आधा एक घंटे के लिए एकांत में बैठ जाएं और साल भर हम ने जो अच्छे काम किए उन्हें सकारात्मक कामों के खाने में नोट करें और जो बुरे काम किए उन्हें नकारात्मक के खाने में नोट करें, आप में जो कमियाँ और बुराइयाँ पाई जाती हैं उनको एक एक करने नोट कर लें, फिर उन अच्छाइयों और बुराइयों को उनके महत्व और खतरनाकी के अनुपात उन्हें क्रमबध करें,  उसके बाद सर्व प्रथम अपनी अच्छाइयों पर विचार करें और उनमें उत्तमता लाने के भले उपाय को ध्यान में बैठायें फिर अपनी एक एक त्रुटि और बुराई पर विचार करें, फिर सोचें कि यह बुराई हम से क्यों हो रही है उसके कारण क्या हो सकते हैं, उसे ध्यान में लायें फिर सोचें कि उन के कारणों से कैसे मुक्ति प्राप्त की जा सकती है।

तो हम नव वर्ष के शुभ अवसर पर अपने प्रत्येक पाठकों से अनुरोध करेंगे कि वह आज रात इस नुस्खा को अपने व्यावहारिक जीवन में जगह दें,  अपने एक वर्ष के कर्मों का जाइज़ा लें, अपने भविष्य के लिए एक रणनीति तैयार करें ।

यदि हमारे अंदर यह सोच आ जाए कि अल्ला सुन रहा है, देख रहा है, हमारी निगरानी कर रहा है। फरिश्ते (स्वर्ग दूत) हमारी एक एक प्रक्रिया का रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं , जिन अंगों को हमने तज्ज़त पहुंचाने के लिए पाप किया था वही अंग हमारे खिलाफ गवाही देंगे, बल्कि यह धरती भी हमारे खिलाफ गवाही देगी जहाँ हमने पाप किया था, तो निश्चित रूप में एक मनुष्य पापों से बचने लगेगा।

अल्लाह हम सब की सुधार फरमाये और जब हमारा अन्त हो तो ईमान पर अन्त हो। आमीन

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